आचार्य महामंडलेश्वर पद को लेकर संतों में तकरार

हरिद्वार कुंभ से पहले निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पद को लेकर संतों में मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है।

हरिद्वार | हरिद्वार कुंभ से पहले निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पद को लेकर संतों में मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है। निरंजनी अखाड़े ने जहां आचार्य महामंडलेश्वर पद पर अपना दावा करने वाले स्वामी प्रज्ञानानंद को अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं स्वामी प्रज्ञानानंद ने पूरे मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
 स्वामी प्रज्ञानानंद के अनुसार मार्च, 2019 में वाराणसी में निरंजनी अखाड़े ने ही तमाम साधु-संतों के बीच आचार्य महामंडलेश्वर पद पर उनका चयन किया था। लेकिन बिना बताए हरिद्वार में कुछ दिन पहले इसी पद पर अग्नि अखाड़े के स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी को बैठा दिया गया। स्वामी प्रज्ञानानंद के अनुसार किसी भी अखाड़े में आचार्य महामंडलेश्वर का एक ही पद होता है और स्वामी कैलाशानंद की इस पद पर नियुक्ति पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है… यही नहीं स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी इस पद पर बैठने के लायक नहीं हैं। स्वामी प्रज्ञानानंद ने स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी पर कई गंभीर आरोप लगाए।
 उधर पूरे मामले में निरंजनी अखाड़े और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने आगे आते हुए स्वामी प्रज्ञानानंद पर गंभीर आरोप जड़ दिए। नरेंद्र गिरी के अनुसार अखाड़े के रमता पंचों को पूरा अधिकार होता है कि वह कभी भी आचार्य पद पर किसी की नियुक्ति कर सकते हैं और किसी को भी इस पद से हटा सकते हैं। ऐसे में जब से आचार्य महामंडलेश्वर पद पर स्वामी प्रज्ञानानंद बैठाए गए… उन्होंने एक बार भी अखाड़े की तरफ मुड़ कर नहीं देखा। यही नहीं उन्होंने अखाड़े के किसी भी धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया। लिहाजा अखाड़े के सभी पदों से उनको निष्कासित किया जाता है। महंत नरेंद्र गिरि के अनुसार जल्द ही अखाड़ा परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाकर उन्हें फर्जी संत भी घोषित किया जाएगा।
 

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