चमोली आपदा | देश से कटे इन गांवों तक मदद पहुंचाते जवान

सेना व आइटीबीपी के जवान बीहड़ पैदल रास्तों, जंगलों, चट्टानी क्षेत्र से गुजरकर गांवों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं।

 

जोशीमठ | जोशीमठ-मलारी हाईवे पर ऋषिगंगा में हिमखंड आने से रैणी गांव में पुल बहने के बाद भारत-चीन सीमा के 13 गांव अलग-थलग पड़े हुए हैं। रेणि में पैदल पुल सहित बॉर्डर रोड को जोड़ने वाले एकमात्र ब्रिज के आपदा में तबाह होने के बाद आज चौथे दिन भी नीति मलारी भारत तिब्बत बॉर्डर का संपर्क देश से कटा रहा।

ऐसे में एसडीआरएफ और आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम बॉर्डर रोड को जोड़ने और ग्रामीणों को आवाजाही कराने के लिए जिप रोप विधि से पुल बना रही है। देश से कटे इन गांवों में सेना के जवान छह किमी पैदल चलकर प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं।

चमोली जिले में नीति-मलारी हाईवे पर रैणी पुल बहने के बाद रैणी, लाता, जुगजू जुआग्वाड़, पैंग मुरंडा, सूगी भलगांव समेत 13 गांवों के ग्रामीण अलग-थलग पड़े हैं। इन गांवों में सेना की ओर से रसद, दवाएं और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। लेकिन, कई प्रभावित गांव ऐसे हैं जो सड़क से छह किमी दूर हैं।

जुगजू, जुआग्वाड़, पैंग, मुरंडा सड़क से छह किमी तक दूरी वाले गांव हैं। इन गांवों में रसद व अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए सेना व आइटीबीपी के जवान बीहड़ पैदल रास्तों, जंगलों, चट्टानी क्षेत्र से गुजरकर प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। आपदा प्रभावित सूगी के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह बुटोला कहते हैं, आपदा की इस घड़ी में जिस प्रकार सेना और आइटीबीपी के जवान सुदूरवर्ती गांवों तक पैदल राहत सामग्री पहुंचा रही है, यह काबिलेतारीफ है।

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