गैरसैंण-भराड़ीसैण को मिली ग्रीष्मकालीन राजधानी की मंजूरी

सोमवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने के लिए मंज़ूरी दे दी।

देहरादून: उत्तराखंड के लिए आज की बड़ी खबर रही गैरसैंण-भराड़ीसैण को मिली ग्रीष्मकालीन राजधानी की मंजूरी। सोमवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने के लिए मंज़ूरी दे दी। आपको बता दें कि भराड़ीसैंण में हुए विधानसभा सत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी का विधेयक पास हुआ था।

प्रदेश के लोगों की वर्षो पुरानी मांग आज पूरी हो गयी। ये फैसला उन लोगों के दिलों को ज़रूर सुकून देगा जिन्होंने पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिये लंबा संघर्ष किया।

साथ ही ये श्रद्धांजलि होगी उन शहीदों को जिन्होंने आंदोलन में अपनी जानें गवाईं। आपको बता दें कि मार्च में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंन्द्र सिंह रावत ने गैरसैंण-भराड़ीसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था।

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सोमवार को आदेश भी जारी कर दिया। इसके साथ ही उत्तराखंड पांचवा प्रदेश हो गया है जिसकी दो-दो राजधानियां होंगी। हिमाचल प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था है जहाँ ग्रीष्म ओर शीतकालीन राजधानियां अलग-अलग हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी इस सन्दर्भ में एलान किया था। साल 2017 ‌के विधान सभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने दृष्टि पत्र में भी गैरसैंण को ग्रीष्मलीन राजधानी घोषित करने का भरोसा दिया था। उस वक्त भाजपा ने कहा था कि स्थायी राजधानी के लिए विचार किया जाएगा।

उत्तराखंड राज्य को राज्य बनाने के लिए बहुत से आन्दोलनकारियों ने संघर्ष किया था। आंदोलनकारियों की मांग ये भी थी कि गैरसैंण को राजधानी बनाया जाए लेकिन हालातों और संसाधनों के चलते देहरादून को अस्थाई राजधानी बनाया गया। शीत सत्र में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने की घोषणा की थी जिसके चलते राजनीतिक हलकों में खासी हलचल पैदा हुई थी।

 

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