नयी सुबह की ओर | गाँव लौटे युवा अब कर रहे सामूहिक खेती

विश्व एक बेहद कठिन दौर से गुज़र रहा है लेकिन, इस दौर की कठिनाई कई लोगों को नया नजरिया, नयी सोच भी दे रही है।

पौड़ी: कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियाँ कई बार व्यक्ति को एक नए तरीके से ज़िन्दगी जीने का सबक दे जाती हैं। विश्व एक बेहद कठिन दौर से गुज़र रहा है लेकिन, इस दौर की कठिनाई कई लोगों को नया नजरिया, नयी सोच भी दे रही है।

ऐसा ही एक उदाहरण विकासखंड पाबौ के पाली गांव के युवाओं ने पेश किया है। लॉक डाउन के दौरान गांव को लौटे युवाओं ने सामूहिक रूप से खेती करनी शुरू कर दी है। इन युवाओं का कहना है कि सामूहिक रूप से खेती करने पर मानव संसाधनों की कमी नहीं खलेगी। और ये कौन नहीं मानता कि एकता में बल होता है। साथ ही बंजर पड़े खेतों को भी आबाद किया जा सकेगा। यहां तक की युवाओं ने खेतों में ही टैंट लगा कर डेरा डाला हुआ है। इनका मानना है कि पहाड़ में खेती स्वरोजगार का सबसे किफायती विकल्प है।

युवाओं की इस पहल को अन्य ग्रामीणों ने भी खूब सराहा है। बुजुर्ग ग्रामीण इन युवाओं को खेती के गुर भी सिखा रहे हैं। लॉक डाउन के चलते रोजगार समाप्त होने से गांव की ओर लौटे युवा प्रवासी अब गांव में ही रह कर स्वरोजगार का मन बना रहे हैं। कुछ युवाओं ने पशुपालन तो कुछ ने खेती का काम भी शुरू का दिया है। शहरों से लौटे ये युवा अब नए तरीके से खेती करने का प्रयास कर रहे हैं।

मगर ये युवा प्रशासन की बेरुखी से खफा हैं। ये युवा बताते हैं कि उनके गांव में पहले प्याज व आलू की अच्छी पैदावार होती है। आलू व प्याज की पैदावार पूरे साल भर चलती थी। लेकिन धीरे-धीरे जंगली जानवरों ने इन फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू किया। अब स्थिति यह है कि जंगली जानवर फसलों को पूरी तरह बरबाद कर रहे हैं। जंगली जानवरों का यह आंतक पलायन का मुख्य कारण है। यदि प्रशासन हमारी फसलों को बचाने मे हमारा सहयोग करे तो हम गांव छोड़ कर नही जाएंगे।

अब जब युवा यहाँ रुकने को तैयार हैं तो ये प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि उनकी समस्याओं का समय रहते निवारण करें, अन्यथा समस्या वहीं की वहीँ रह जायेगी।

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