पहाड़ की विकास व्यथा | पौड़ी के निकटवर्ती गाँवों में छा रहे पेयजल संकट के बादल

कोठार गांव में प्राकृतिक स्रोत पर 30 परिवार निर्भर करते हैं और बढ़ती गर्मी के साथ-साथ पानी में भी कमी देखने को मिल रही है।

पौड़ी: पहाड़ जितने खूबसूरत हैं, पहाड़ में रहने वाले लोगों का जीवन उतना ही चुनौतीपूर्ण। तमाम तरह के प्राकृतिक स्रोतों के होने के बावजूद पानी पहाड़ों में बसने वाले बाशिंदों के लिए कई बार एक बड़ी चुनौती होता है। पहाड़ों में लगातार बढ़ रही गर्मी के बाद पेयजल संकट भी बढ़ने लगा है। पौड़ी के समीप कोठार, मोलखंडी आदि गांव में बढ़ती गर्मी के साथ-साथ पानी की किल्लत भी शुरू हो गई है।

कोठार गांव में प्राकृतिक स्रोत पर 30 परिवार निर्भर करते हैं और बढ़ती गर्मी के साथ-साथ पानी में भी कमी देखने को मिल रही है।

कोठार गांव के ग्रामीण भास्कर ने बताया कि इस प्राकृतिक स्रोत की मदद से करीब 30 परिवार अपनी प्यास बुझाते है। रोजाना लोग अपने घरों से इस प्राकृतिक स्रोत तक पानी लेने पहुंचते हैं। बढ़ रही गर्मी के चलते पानी भी कम होता जा रहा है। हालाँकि इस बार लगातार हुई बारिश के चलते पानी कम होने के बावजूद अभी सामान्य अवस्था में है लेकिन जिस तरह से लगातार गर्मी पड़ रही है उससे कुछ ही दिन में इस पानी में काफी कमी देखने को मिलेगी।

ज्योति बहुगुणा जो कि यहीं रहते है वो बताते हैं कि वह समय-समय पर विभाग से मुलाकात कर पेयजल समस्या के निवारण के लिए मुलाकात कर चुके हैं लेकिन किसी भी प्रकार का कोई हल निकलकर नहीं आया है। आज भी लोग यहाँ इसी प्राकृतिक जल स्रोत के भरोसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। रोजमर्रा के लिए ये लोग इसी पानी पर निर्भर है।

रश्मि बहुगुणा, जो कि एक गृहणी हैं, बताती है कि गर्मियों के समय पानी काफी कम होने के चलते वह खेती नहीं कर पाते हैं और बरसात के बाद ही भरपूर पानी होने के चलते खेती की शुरुआत कर पाते हैं। कुल मिलकर पानी के कनेक्शन की कमी के चलते न सिर्फ यहाँ रोज़मर्रा के कार्य बाधित हैं, बल्कि इनके लिए खेती करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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