पुराने शासनादेशों से जूझते ग्राम प्रधान, नहीं मिले नए आदेश

तमाम क्वारन्टीन सेंटरों में प्रवासियों की रेख देख और सभी व्यवस्थाओं का ज़िम्मा सम्भाल रहे ग्राम प्रधानों को सूचना तंत्र की कमजोरी का खामियाज़ा उठाना पड़ रहा है।

पौड़ी: ग्रामीण क्षेत्र के तमाम क्वारन्टीन सेंटरों में प्रवासियों की रेख देख और सभी व्यवस्थाओं का ज़िम्मा सम्भाल रहे ग्राम प्रधानों को अब सूचना तंत्र की कमजोरी का खामियाज़ा उठाना पड़ रहा है। कुछ ऐसे पुराने शासनादेश जो कि पूर्व में जारी होने के बाद कुछ ही दिनों में निरस्त हो गए थे, वो अब ग्राम प्रधानों की दिक्कतें बढ़ा रहे हैं।

मिसाल के तौर पर एक पुराने शासनादेश के अनुसार ग्राम प्रधानों को पीपीई कीट लेना अनिवार्य किया गया था जिनकी कीमत प्रति किट 10 हजार थी।  लेकिन नए शासनादेश प्राप्त न होने के कारण प्रधान परेशानहाल थे।

असल में इन पुराने शासनादेशों के बदले जो नए शासनादेश जारी हुए, वे कभी ग्राम प्रधानों तक पहुंचे ही नहीं। नए शासनादेश सूचना तंत्र की कमजोरी के चलते ग्राम प्रधानों तक न पहुँचने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों की सरदर्दी बढ़ रही थी।

पुराने शासनादेशों से जूझते प्रधानों को इसकी जानकारी तब हुई जब वे पुराने शासनादेश लेकर डीएम से मिले और शासनादेश में लिखी शर्तों को पूरा न करने की आपत्ति जताई। पीपीई किट पर जब प्रधानों ने जिलाधिकारी के समक्ष आपति जताई तब उन को डीएम पौड़ी द्वारा ज्ञात हुआ कि नए शासनादेश कड़े मन्थन के बाद जारी हो चुके हैं जिस के अनुसार ग्राम प्रधान इच्छानुसार इन किट को ले पाएंगे जो इन्हें लेने में खुद को सक्षम मान रहे हैं।

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