गौरव का पल | नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीम ने किया अनछुए पर्वत का आरोहण

गंगोत्री रेंज के इस दुर्गम हिम शिखर पर पहली बार कोई पर्वतारोही दल सफल आरोहण करने मे सफल रहा।

 

गंगोत्री रेंज के इस दुर्गम हिम शिखर पर पहली बार कोई पर्वतारोही दल सफल आरोहण करने मे सफल रहा।यमकेश्वर: देश को अभी तक कई नामी पर्वतारोही देने वाली उत्तरकाशी स्थित नेहरु पर्वतारोहण संस्थान ने प्रदेश मे साहसिक खेलों को बढ़ावा देने व युवाओं को साहसिक क्रिया-कलापों की ओर आकर्षित करने के लिये ‘हार्न आफ हर्षिल’ का अधूरा अभियान 22 जून से शुरु किया जिसे सूबे के मुख्य मंत्री द्वारा संस्थान के प्रधानाचार्य मूल निवासी यमकेश्वर कर्नल अमित बिष्ट सेना मैडल के नेतृत्व मे 6 सदस्यीय दल के साथ फ्लैग आफ कर रवाना किया गया।

गत वर्ष सेब महोत्सव के दौरान जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉo आशीष चौहान व हर्षिल निवासी माधवेंद्र रावत ने इस अनछुये पर्वत पर आरोहण की योजना बनायी थी जिसका जिम्मा नेहरु पर्वतारोहण संस्थान को दिया गया था। अभियान शुरु होने के बाद खराब मौसम व बर्फीले तूफ़ान ने पर्वतारोहियों को आगे बढ़ने से रोक दिया व अभियान पूरा न हो सका।

उसी अभियान को आगे बढाते हुये सेना के जांबाज अधिकारी कर्नल अमित बिष्ट, जो एक जाने माने आरोही हैं, ने अपनी टीम के साथ योजना बनाई व इस अनछुये पर्वत पर तिरंगा व संस्थान का ध्वज लहराने का संकल्प लिया जिसे सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ध्वज प्रदान कर आरोहण के लिये विदा किया।

इस दौरान उच्च हिमालय क्षेत्र मे आरोहण दल को काफी विकट समस्याओं से जूझना पड़ा। तीव्र गति से चलने वाली शीत लहर पहाडों का अत्यधिक खराब मौसम व बर्फीले तूफान ने कई बार इन जांबाज पर्वतारोहियों को रोकने का प्रयत्न किया लेकिन कर्नल अमित बिष्ट के नेतृत्व मे बुलंद हौंसले व दृढ निश्चय के साथ आगे बढ़ रहे जांबाज पर्वतारोही निम के उप प्रधानाचार्य योगेश, सौरभ रोतेला, शिवराज पंवार, थिलनिस ग्यालबु एवं चतर सिंह ने इस दुर्गम शिखर पर तिरंगा लहराकर देश प्रदेश व संस्थान को गौरवान्वित किया।

गंगोत्री रेंज के इस दुर्गम हिम शिखर पर पहली बार कोई पर्वतारोही दल सफल आरोहण करने मे सफल रहा। यमकेस्वर के पूर्व सैनिक पर्वतारोही वर्तमान मे क्षेत्र पंचायत सदस्य बूंगा सुदेश भट्ट सहित प्रदेश भर के पर्वतारोहियों ने दल के सफल आरोहण के लिये पुरे आरोहण दल के लिये शुभ कामनायें प्रेषित कीं व कहा कि निम की इस सफलता से भारत भर के पर्वतारोहियों के साथ साथ यमकेश्वर मे भी हर्ष की लहर है। इसके साथ ही साहसिक खेलों मे रुचि रखने वाले युवाओं को पर्वतारोहण के प्रति निॆश्चित ही प्रेरणा मिलेगी।

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