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कांग्रेस करेगी बदरी-केदार से गढ़वाल का शंखनाद, आस्था की राह पर सियासी संदेश

बदरी केदार से कांग्रेस अपने अभियान की शुरुआत कर रही है. यह सिर्फ दर्शन का कार्यक्रम नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी है.

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर आस्था और रणनीति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से इस बार सियासत का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जहां धार्मिक आस्था के केंद्र अब राजनीतिक संदेशों के मंच बनते नजर आ रहे हैं. खासतौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस दिशा में एक नई पहल करते हुए अपने अभियान की शुरुआत बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से करने का निर्णय लिया है. साथ ही कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है.

यह केवल एक धार्मिक यात्रा या दर्शन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक सोच और रणनीति छिपी हुई मानी जा रही है. कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का यह दौरा गढ़वाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर केंद्रित रहेगा, जो यह संकेत देता है कि पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है. गढ़वाल क्षेत्र में स्थित केदारनाथ और बदरीनाथ धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी बेहद व्यापक है. ऐसे में कांग्रेस का इन धामों से अपने कार्यक्रम की शुरुआत करना एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है.

अब तक उत्तराखंड की राजनीति में धार्मिक मुद्दों और सनातन आस्था के प्रतीकों पर मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है. भाजपा ने लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े प्रतीकों को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बनाया है. लेकिन अब कांग्रेस भी उसी पिच पर उतरती नजर आ रही है, जिससे सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है. कांग्रेस के भीतर इस दौरे को लेकर दो तरह के नजरिए सामने आ रहे हैं. एक ओर पार्टी इसे जनसंपर्क और संगठन को मजबूत करने का अभियान बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे आस्था के सहारे राजनीति करने की कोशिश के रूप में देख रहा है.

पार्टी के लिए धर्म केवल आस्था का विषय है और कांग्रेस धर्म को राजनीति से जोड़कर नहीं देखती. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से धर्म का राजनीतिक लाभ उठाती रही है और पीएम नरेंद्र मोदी भी चुनावों से पहले धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश करते हैं.
-अमेंद्र बिष्ट, कांग्रेस नेता-

गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य जिलों में प्रस्तावित बैठकों को केवल संगठनात्मक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा रहा है. यह कार्यक्रम स्थानीय भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. इन इलाकों में धार्मिक आस्था का गहरा प्रभाव है, ऐसे में यहां से सियासी संदेश देना बेहद प्रभावी माना जाता है. कुमारी शैलजा का यह दौरा 6 मई से शुरू होने जा रहा है. वह सबसे पहले ऋषिकेश पहुंचेंगी, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगी. इसके बाद 7 मई से उनके राजनीतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी. इस दिन वह श्रीनगर में जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी और संगठन की स्थिति का जायजा लेंगी.

कांग्रेस संगठन का यह दौरा महत्वपूर्ण है. कार्यक्रम कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम करेगा.
-गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष-

8 मई को उनका कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वह केदारनाथ धाम पहुंचेंगी और वहां पूजा-अर्चना करेंगी. यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम होगा. इसी दिन वह अगस्त्यमुनि में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी और इसके बाद रुद्रप्रयाग में भी जिला स्तर के नेताओं के साथ बैठक करेंगी. इसके अगले दिन यानी 9 मई को उनका दौरा चमोली जिले में रहेगा, जहां वह बदरीनाथ धाम पहुंचेंगी और वहीं रात्रि विश्राम करेंगी. 10 मई को सुबह वह बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और इसके बाद जोशीमठ में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी. इस दौरान पार्टी की रणनीतियों और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा की जाएगी.

11 मई को कुमारी शैलजा टिहरी गढ़वाल के चंबा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी. इस तरह करीब 5 से 6 दिनों के इस दौरे में वह पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जाकर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगी और कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगी. हालांकि इस पूरे दौरे का सबसे अहम पहलू बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में होने वाले कार्यक्रम हैं. यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भी आस्था और परंपरा के साथ खड़ी है और जनता की भावनाओं को समझती है.