पहाड़ की विकास व्यथा I 27 करोड़ की पेयजल पंपिंग योजना नहीं दे पा रही पानी

पौड़ी ज़िले के कल्जीखाल ब्लॉक में 27 करोड़ की लागत से बन रही चिन्वाड़ी डांडा पेयजल पंपिंग योजना 4 साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों के हलक को अब तक तर नहीं कर पाई है।

पौड़ी: पौड़ी ज़िले के कल्जीखाल ब्लॉक में 27 करोड़ की लागत से बन रही चिन्वाड़ी डांडा पेयजल पंपिंग योजना 4 साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों के हलक को अब तक तर नहीं कर पाई है। ऐसे में इस योजना से लाभान्वित होने वाले 68 गांवों के ग्रामीणों को आज भी हर रोज पेयजल संकट से दो चार होना पड़ रहा है।

चिन्वाड़ी डांडा पेयजल पंपिंग योजना के तहत वाटर टैंक और पाईप लाईन का जाल बड़ी तेजी के साथ बिछाया गया था लेकिन बावजूद इन सबके अब भी इस क्षेत्र के अधिकत ग्रामीण मीलों चलकर जल स्रोतों से ही पानी की आपूर्ति के लिए बाध्य हैं।

और अब इन जल स्रोतों के भरोसे बैठे ग्रामीणों की दिक्कत अब गर्मी ने बढ़ा दी है। गर्मी बढ़ने से जल स्रोत सूखने लगे हैं जिससे ग्रामीणों की दिक्कतें अब और बढ़ गयी हैं।

बूंद-बूंद पानी को तरसती इस क्षेत्र की जनता को इस पेयजल योजना से अब तक एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो पाया है। ग्रामीणों की माने तो वर्ष 2003 से ही वे लोग पेयजल पंपिंग से इस ब्लॉक को जोडने की मांग सरकार से कर रहे थे जिसके लिये उन्होने कई आंदोलन भी किये।

काफी लेट लतीफी के बाद साल 2016 में हरीश रावत सरकार के दौरान 27 करोड़ की लागत के साथ शरू हुई ये पम्पिंग योजना 4 साल बाद भी अपना मकसद पूरा नहीं कर सकी है।

ज़ाहिर है ग्रामीणों ने निर्माणदायी संस्था और पेयजल निगम को अब सवालों के कटघरे में खडा किया है। ग्रामीणो का कहना है कि योजना में कई तरह की खामियां भी उन्हें नजर आ रही हैं हालांकि पेयजल निगम की माने तो कई बार विधुत आपूर्ति ठप होने कारण जिन गांवों को पानी के आपूर्ति की भी जा रही थी वहां भी पानी अप्लिफ्टिंग न होने के कारण कुछ दिनों से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पाई हैं। वहीं योजना में खामियों को दूर करने के लिये पेयजल निगम के अधिशासी अधिकारी ने आश्वासन दिया है जिससे योजना में काई कमी पेशी न रह जाये।

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