चमोली | कड़ाके की ठंड में भी जीतू बगडवाल नृत्य का आयोजन

जनपद चमोली में इस कड़ाके की ठंड में भी जीतू बगडवाल नृत्य का क्षेत्रवासियों ने धूम धाम से आयोजन किया |

 

चमोली | जनपद चमोली में इस कड़ाके की ठंड में भी जीतू बगडवाल नृत्य का क्षेत्रवासियों ने धूम धाम से आयोजन किया |

मान्यताओं के अनुसार गढ़वाल रियासत की गमरी पट्टी के बगोड़ी गांव पर जीतू का आधिपत्य था, अपनी तांबे की खानों के साथ उसका कारोबार तिब्बत तक फैला हुआ था , एक बार जीतू अपनी बहन सोबनी को लेने उसके ससुराल रैथल पहुंचता है। बहाना अपनी प्रेयसी भरणा से मिलने का भी था , जो सोबनी की ननंद थी। दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने थे।

जीतू बांसुरी भी बहुत सुंदर बजाता था ,और एक दिन वह रैथल के जंगल में जाकर बांसुरी बजाने लगा, बांसुरी की मधुर लहरियों पर आछरियां (परियां) खिंची चली आई। वह जीतू को अपने साथ ले जाना (प्राण हरना) चाहती हैं। तब जीतू उन्हें वचन देता है कि वह अपनी इच्छानुसार उनके साथ चलेगा।

आखिरकार वह दिन भी आता है, जब जीतू को परियों के साथ जाना पड़ा। जीतू के जाने के बाद उसके परिवार पर आफतों का पहाड़ टूट पड़ा। जीतू के भाई की हत्या हो जाती है। तब वह अदृश्य रूप में परिवार की मदद करता है। राजा जीतू की अदृश्य शक्ति को भांपकर ऐलान करता है कि आज से जीतू को पूरे गढ़वाल में देवता के रूप में पूजा जाएगा। जीतू का वह सेरा आज भी सेरा मल्ली नाम से प्रसिद्ध है। तभी से गढ़वाल में बगड़वाल नृत्य का आयोजन किया जाता है ।

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