February 3, 2026

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उत्तराखंड को 16वें वित्त आयोग से नहीं मिलेगी 30 हजार करोड़ की मदद, राज्य को बढ़ाने होंगे अपने संसाधन

उत्तराखंड को अगले पांच वर्षों में लगभग 30 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं होगी। राजस्व घाटा अनुदान के साथ ही राज्य विशिष्ट अनुदान को 16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्थान नहीं दिया।

आयोग की संस्तुतियों के आधार पर केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में जो वृद्धि की गई है, उससे नौ से 10 हजार करोड़ रुपये ही अधिक प्राप्त होंगे।

ऐसे में शेष 20 हजार कराेड़ की पूर्ति के लिए स्वयं के संसाधनों से आय बढ़ाना राज्य के लिए जरूरी हो गया है, ताकि वेतन-भत्तों के भुगतान और विकास कार्यों के लिए बाजार से बार-बार ऋण लेने की नौबत न आने पाए। आश्चर्य नहीं कि, यह नई व्यवस्था राज्य के वार्षिक बजट के आकार पर भी प्रभाव डालती दिखाई दे।

16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान और राज्य की विशेष आवश्यकताओं के लिए अनुदान की संस्तुति नहीं की है। आयोग की संस्तुतियों का प्रभाव एक अप्रैल, 2026 यानी अगले वित्तीय वर्ष के प्रारंभ से दिखाई देगा। ये संस्तुतियां वर्ष 2026 से 2031 तक कुल पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेंगी। इससे पहले 15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2021 से 2026 तक अपनी संस्तुतियों में उत्तराखंड के लिए राजस्व घाटा अनुदान और राज्य विशिष्ट अनुदान की संस्तुतियां की थीं।

पांच वर्ष की अवार्ड अवधि के लिए कुल 28,147 करोड़ राजस्व घाटा अनुदान संस्तुत किया गया था। इसके अनुसार वर्ष 2021-22 में 7772 करोड़, वर्ष 2022-23 में 7137 करोड़, वर्ष 2023-24 में 6223 करोड़, वर्ष 2024-25 में 4916 करोड़ और वर्ष 2025-26 में 2099 करोड़ की राशि प्रदेश के हिस्से में आई।

अवार्ड अवधि के पहले वर्ष में अधिक मिलेंगे 1841 करोड़ इसी प्रकार पांच वर्ष की अवधि के लिए विशिष्ट अनुदान के रूप में 1600 करोड़ की संस्तुति की गई थी। इन दोनों को मिलाने पर यह राशि 29,971 करोड़ होती है।

यही नहीं, आपदा प्रबंधन मद में पिछली बार निर्धारित कुल धनराशि में इस बार अवार्ड अवधि में 224 करोड़ रुपये कम किए गए हैं। इस प्रकार, वित्तीय वर्ष 2026-27 से अगले पांच वर्षों में राज्य को 30 हजार करोड़ से अधिक राशि से वंचित रहना पड़ा। राहत की बात यह है कि 16वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 0.02 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे अवार्ड अवधि के पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 में ही राज्य को 1841.16 करोड़ रुपये बढ़कर प्राप्त होंगे। प्रति वर्ष इस राशि में वृद्धि होनी है। पांच वर्षों में इस मद में आयोग की संस्तुतियों के आधार पर 9200 करोड़ से अधिक धनराशि मिलना तय है।

वित्तीय अनुशासन की राह पर बढ़ने का मिलेगा लाभ
इस मद में अधिक धनराशि की प्राप्ति को राज्य अपनी उपलब्धि के रूप में देख रहा है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि राजस्व घाटा अनुदान के बल पर राज्य ने वित्तीय अनुशासन पर काम किया तो बढ़ते ऋण भार को भी नियंत्रित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य ने अपने संसाधनों से आय जुटाने के लिए हाथ-पांव मारे। फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाया। पांच वर्षों में करों व अन्य संसाधनों से होने वाली आय डेढ़ गुना से अधिक बढ़ी। लगातार छह वर्षाें से राजस्व सरप्लस की स्थिति है। केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ने और शहरी निकायों एवं पंचायतों के लिए अनुदान में भी बड़ी वृद्धि की गई है।