January 12, 2026

Newz Studio

सरल और संक्षिप्त

प्रवासियों के साथ बीत रही क्या… दर्द बयां करता ये गढ़वाली गीत

कोरोना के कारण समाज में टूटन और अपनों की दशा के मार्मिक वर्णन के इस गीत को आप भी सुनें और फिर सुनें मनीष की समाज से अपील और गीत को बनाने का कारण...।

पौड़ी: कोरोना के डर के कारण बाहरी राज्यों से अपने घर लौट रहे प्रवासियों से हो रहे भेदभाव और क्वारंटीन पीरियड में अपनों की नजरअंदाजी का दर्द अब गीतों के माध्यम से बयां होने लगा है। इसीका उदाहरण है पौड़ी जनपद के कल्जीखाल ब्लॉक के महड़ गांववासी युवक मनीष पंवार का गीत जिनमें प्रवासियों को अपने ही घर में अपनों से मिलते परायेपन का दर्द है।

दिल्ली से लौटकर जीआईसी साकिनखेत में 13 लोगों के साथ क्वारंटीन मनीष अपने तबलची दोस्त के साथ हारमोनियम पर खुद के रचित गढ़वाली गीत को जब गाता है तो हर किसी की आंख नम हो जाती है। कोरोना के कारण समाज में टूटन और अपनों की दशा के मार्मिक वर्णन के इस गीत को आप भी सुनें और फिर सुनें मनीष की समाज से अपील और गीत को बनाने का कारण…।