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धामी सरकार वन भूमि पर बसे परिवारों को देगी भूमिधरी अधिकार! नई नीति पर काम जारी

धामी सरकार वन भूमि पर बसे परिवारों को देगी भूमिधरी अधिकार! नई नीति पर काम जारी
बिंदुखत्ता समेत अन्य स्थानों पर वन भूमि में बसे परिवारों को भूमिधरी अधिकार देने की दिशा में धामी सरकार गंभीरता से कदम बढ़ा रही है। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान सदन को बताया कि ऐसे वन क्षेत्रों को गैर आरक्षित वन भूमि घोषित करने के लिए विस्तृत नीति पर काम चल रहा है। इसके बाद सरकार की इस मंशा से उच्चतम न्यायालय और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को अवगत कराते हुए उनकी सहमति लेने का कार्य किया जाएगा।
वहीं सत्र के दौरान, बुधवार को नजारा कुछ बदला सा था। हंगामे की नौबत नहीं आई, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने ही तेवर खूब दिखाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संबोधन के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। साथ ही 11 विधेयक भी पारित किए गए। देर रात, राज्य के बजट पर चर्चा शुरू हो गई।

बुधवार को सदन में नियम 310 से नियम-58 में परिवर्तित भूमिधरी अधिकार विषय पर विपक्ष के मुद्दों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि वन भूमि पर बसे व्यक्तियों को भूमिधरी अधिकार देने के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ इस पर अंतिम निर्णय की ओर बढ़ रही है। इसके अलावा राजस्व समेत अन्य प्रकार की भूमि पर दशकों से बसे व्यक्तियों को भी भूमिधरी अधिकार देने पर भी गंभीरता से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस विषय पर बात रखी कि विभिन्न जिलों में भूमिधरी की समस्या से लेकर ग्रामीण जनता जूझ रही है। उन्होंने कहा कि वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने के लिए केंद्र की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अन्य कांग्रेस विधायकों ने अपना पक्ष रखा। पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस विषय को अग्राह्य कर दिया।