उत्तराखंड में ‘जन-जन की सरकार’ अभियान की सफलता: 65 दिन में 5 लाख लोगों को मिला लाभ
विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के गांवों के निवासियों की छोटी-छोटी शिकायतें लंबित रहती थीं।
सरकार ने ग्रामीणों की इस दिक्कत को गंभीरता से महसूस किया और फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर सामने आया ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसा नवोन्मेषी और दूरगामी परिणाम देने वाला अभियान।
इस नये प्रयोग ने आमजन को उसके द्वार पर ही सीधे-सीधे शासन-प्रशासन से जोड़ा। 65 दिन तक चले इस अभियान के दौरान पांच लाख से अधिक लोग इससे जुडे।
न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित 681 शिविरों के माध्यम से 33 हजार जनशिकायतों का त्वरित समाधान इस अभियान की सफलता का द्योतक है।
जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार अभियान उत्तराखंड में सुशासन और संवेदनशील प्रशासन का प्रभावी माडल बनकर उभरा है। यह अभियान सरकार को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाने की कार्यशैली का जीवंत उदाहरण है।पिछले वर्ष 17 दिसंबर को जब गांव के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोडऩे के उद्देश्य से यह नवोन्मेषी प्रयोग शुरू किया गया, तब शायद किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह इतनी बड़ी सफलता अर्जित करेगा।
अभियान के तहत न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों में जिस तरह से जनमानस उमड़ा, उसे देखते हुए अभियान की अवधि 20 दिन बढ़ा दी गई। पहले यह अभियान 45 दिन चलना था, जो 20 फरवरी तक संचालित हुआ।
संवाद से समाधान तक
अभियान का उद्देश्य शासन- प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना है। यानी, किसी भी समस्या का संवाद के जरिये समाधान इसका मूलमंत्र रहा है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि प्रशासन अब सीधे गांव में पहुंचकर चौपाल लगा रहा है।
