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उत्तराखंड में बुजुर्गों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बना रहे साइबर ठग, डिजिटल अरेस्ट कर 3 लोगों से ठगे ₹5.42 करोड़

उत्तराखंड में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। ठगों के लिए बुजुर्ग सबसे आसान शिकार हैं। साइबर ठगों ने पिछले 50 दिनों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर तीन बुजुर्गों को ठगी का शिकार बनाकर उनसे 5.42 करोड़ रुपये ठग लिए।

इन मामलों ने न केवल पुलिस बल्कि आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी हैं। ठग बेहद ही सुनियोजित ढंग से खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और सत्यापन के नाम पर खातों से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर अपराधी यूं तो हर वर्ग के लिए खतरा बने हैं लेकिन वरिष्ठ नागरिक उनके लिए सॉफ्ट टारगेट हैं। अधिकतर वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत्त होकर घर में अकेले और उनके बच्चे नौकरी के लिए बाहर रहते हैं। देखने में आया है कि वरिष्ठ नागरिक एंड्रायड फोन का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन इंटरनेट मीडिया से दूरी रखते हैं।

साइबर अपराधी उन्हें फोन करके इतना डरा देते हैं कि वह इसकी सूचना पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार यहां तक कि अपने बच्चों को तक नहीं बताते। ठग उन्हें कई दिनों तक घर पर ही डिजिटल अरेस्ट कर रखते हैं और उनसे पूरी जमा पूंजी ट्रांसफर करवा लेते हैं। ठगी का एहसास उन्हें तब होता है जब उनके पास ठगों को देने के लिए रुपये नहीं बचते और फिर किसी तरह से साहस कर वह पुलिस को इसकी सूचना देते हैं।