लॉक डाउन 2.0: स्पेशल रिपोर्ट

लॉक डाउन के चलते लोगों को यूँ तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन देश की जनता को शायद अब ये भली भांति समझ में आ गया है कि अगर कोरोना को हराना है अपने देश को बचाना है तो उसके लिये लॉक डाउन के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

देहरादून: वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम को लेकर पहले से ही 14 अप्रैल तक का लॉक डाउन किया गया था। लेकिन अब मौजूदा हालात को देखकर केंद्र ने लॉक डाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब लोगों को 3 मई तक अपने घरों में रहना होगा।

लॉक डाउन के चलते लोगों को यूँ तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन देश की जनता को शायद अब ये भली भांति समझ में आ गया है कि अगर कोरोना को हराना है अपने देश को बचाना है तो उसके लिये लॉक डाउन के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

लगातार बढ़ते कोरोना के मामलों को लेकर दूसरे चरण के लॉक डाउन को अब कड़ाई से लागू करवाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसको लेकर पुलिस और प्रशासन मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।

हालत पर कड़ी नज़र रखते हुए जगह-जगह ड्रोन के जरिये नज़र रखी जा रही है। खासकर कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कड़ी निगरानी की जा रही है। पुलिस अपने दल-बल के साथ फ्लैग मार्च कर रही है और लोगो से घरों में रहने की अपील कर रही है। साथ ही उत्तराखण्ड में अब पैरामिलेट्री फोर्सेज ने भी मोर्चा संभाल लिया है जिसको देखकर लगता है कि सरकार अब लॉक डाउन के मामले में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं होने देगी।

लेकिन इस लॉक डाउन का एक ह्रदय-विदारक पहलू ये भी है कि इस मुसीबत की घड़ी में ग़रीब मजदूर वर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित है। मेहनत करके खाने वाले मजदूर अब सरकार और सामाजिक संस्थाओं के रहम-ओ-कर्म पर हैं। दो वक्त कीरोटी के लिए भी घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है। उसमें भी ज़रूरी नहीं है कि भोजन मिल जाए। ऐसी स्थिति में मजदूर परिवारों व दूध पीते बच्चों के लिये भोजन का संकट बेहद चिंताजनक है। हालांकि सरकार तमाम दावे कर रही है कि भोजन की पर्याप्त व्यवस्था है लेकिन बावजूद इसके ग़रीबों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

 

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