केंद्रीय मंत्री ने दिया दख़ल

उत्तराखंड में डेंगू के महामारी का रूप लेने के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम देहरादून पहुंची है। डॉ घनश्याम पांगती, डॉ आशुतोष विश्वास और डॉ अमित कटेवा ने इस सन्दर्भ में प्रेस वार्ता की।

ख़ास बात:

  • प्रदेश में पिछले कई दिनों से डेंगू महामारी के  रूप में पैर पसार रहा है।
  • ‘नेशनल गाइडलाइन ऑफ डेंगू’ के तहत होगा अब उत्तराखंड में डेंगू का इलाज।

देहरादून: दिल्ली से एक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गठित टीम एनएचएम के तहत शुक्रवार को देहरादून पहुंची। डॉ घनश्याम पांगती, डॉ आशुतोष विश्वास और डॉ अमित कटेवा ने इस सन्दर्भ में प्रेस वार्ता की।

डॉ घनश्याम पांगती ने प्रेस से बात करते हुए बताया कि डेंगू कि बीमारी अब पहले जैसी असाध्य नहीं है। बुखार की सूरत में मरीज़ को ज्यादा से ज्यादा द्रव्य लेने चाहिए व पेरासिटामोल के अलावा बाज़ार में उपलब्ध और कोई दवा नहीं लेते हुए डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है।

उत्तराखंड में डेंगू के महामारी का रूप लेने के बाद आखिरकार शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गठित टीम देहरादून पहुंची है। प्रदेश में पिछले कई दिनों से डेंगू महामारी के  रूप में पैर पसार रहा है। तक़रीबन 1400 से ज्यादा मरीज़ इस वक्त अलग-अलग अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं, तो कई लोगों की अब तक इस से मौत भी हो चुकी है।

वर्तमान में जहां स्वास्थ्य महकमे में दो सचिव और खुद स्वास्थ्य विभाग संभाल रहे मुख्यमंत्री और सरकार के दावों की पोल खुलकर सामने आ गई है। नगर निगम की फोंगिंग भी सवालों के घेरे में आ रही है। लिहाजा आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम को उत्तराखंड सरकार के डॉक्टरों को डेंगू पर रोकथाम लगाने के लिए विचार विमर्श हेतु खुद दखल देना पड़ रहा है।

केंद्र से आई स्वास्थ्य मंत्रालय की गठित टीम द्वारा आज गांधी शताब्दी अस्पताल में प्रदेश के डॉक्टरों के साथ डेंगू पर चर्चा की गई।

2014 में दिल्ली में ऑल इंडिया गाइडेंस के तहत एक गाइडलाइन जारी की गई थी जिसका नाम ‘नेशनल गाइडलाइन ऑफ डेंगू’ था। इसी गाइडलाइन के तहत अब उत्तराखंड में डेंगू का इलाज होगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जानकारी देते हुए कहा कि डेंगू में सबसे पहले प्लेटलेट्स ही कम होती हैं, और ऐसे समय में मरीज बिल्कुल भी ना घबराएं, बल्कि अपने डॉक्टर की सलाह से डेंगू का इलाज घर पर भी किया जा सकता है

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